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Friday, 19 October 2012
मैं बहक गयी २
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मेरी कहानी पार्ट –५
प्रेषक : राजेश राज
मेरे इम्तहान पास आ गए थे अब मै अपनी पढाई पर जयादा ध्यान दे रहा था ,लेकिन भाभी की याद आ ही जाती थी .उस दिन जब मै स्कूल से घर आया तो मेरी मम्मी ने बताया की अगले हफ्ते तुम्हारी मौसी की शादी में जाना है तो मैंने कहा मेरे तो एक्साम्स है मै कैसे जा सकता हूँ ? तो घर में सभी चिंतित हो गए ये सारी बाते भाभी को पता चली तो उन्होंने कहा अरे इसे मेरे घर छोड़ दीजियेगा मै इसे पढ़ा भी दिया करूंगी .
शनिवार को सब लोग जबल पुर चले गए और मै अपनी सारी किताबे ले कर भाभी के घर चला आया .मैंने और भइया ने साथ में ही नाश्ता कर लिया तो भइया ने कहा चलो मै तुम्हे स्कूल छोड़ते हुए जाऊंगा ,स्कूल से मै घर लगभग तीन बजे ही आ गया ,भाभी ने दरवाजा खोला ,भाभी ने आज सफ़ेद रंग की चूडीदार और काले रंग का कुरता पहन रखा था ,आज वो कुछ जादा ही प्रसन्न दिख रही थी ,खाना खा कर हम दोनों बेड रूम में आ गए भाभी ने छोटू को पहले से ही सुला दिया था .भाभी ने बताया की मेरे ब्रा की साइज़ बढ़ गयी है मैंने हंसते हुए कहा बंद इतनी मेहनत कर रहा है तो उसका फल भी मिलेगा .
भाभी ने कहा आज हम दोनों एक खेल खेलेंगे मै तुम्हे एक फ़िल्म दिखाउंगी फ़िर हम दोनों सेक्स करेंगे ,फ़िल्म देखते समय हम अपने कपडे उतर देंगे और एक दूसरे को टच नही करेंगे मैंने कहा भाभी ऐसे तो मजा नही आयेगा तो उसने कहा तुम तो बस देखते जाओ .भाभी ने सी डी पर फ़िल्म लगा दी , अरी ये तो कोई सेक्सी फ़िल्म थी भाभी ने कहा हम एक दोसरे के कपडे उतर देते है .हम दोनों बेड पर ही बैठ कर फ़िल्म देखने लगे .फ़िल्म में औरत लगभग ४० साल की होगी और २५ साल का लड़का होगा दोनों बाथ टब में नहा रहे थे लड़का बाथ टब के किनारे बैठ गया उस का लंड तना हुआ था लड़की सोप लगा कर उसके लंड को सहलाने लगी लड़का तनाव में भरता जा रहा था फ़िर लडके ने सोप लेकर लड़की की चूत रगड़ने लगा उसके बूब्स बहुत बड़े बड़े थे दोनों एक दूसरे के साथ खेलते जा रहे थे फ़िर दोनों नंगे ही बेड रूम में चले गए लड़की बेड पर लेट गयी लडके तौलिए से लड़की का बदन सुखाने लगा उसके बाद उसने लड़की के पैरो की उंगलियो को अपने होठो से चाटने लगा फ़िर वो उसकी चूत पर अपना मुंह लगा दिया .इधर मेरा लंड तनाव से फटने लगा मै अपने हाथो से अपने लंड को हिलाने लगा और मने देखा की भाभी भी अपनी उन्गुलियो को अपनी चूत पर रगड़ रही है
हम दोनों ने एक दूसरे की जरूरत को समझते हुए पास आ गए भाभी ने कहा तुम भी मेरी उन्गोलियो को चूसो मै पागलो की तरह भाभी का तलवा चाटने लगा भाभी के पैर बहुत सुंदर थे भाभी मेरे लंड को हिलाती रही मै अब भाभी की जांघो को चूस रहा था इसमे मुझे बहुत मजा आ रहा था .
धीरे धीरे मेरे होठ भाभी की चूत पर पहुँच गए और मै अमृत का रसास्वादन कराने लगा ,भाभी ने मेरे सर को अपने हाथो से पकड़ रखा था ,भाभी धीरे धीरे सीत्कार ले रही थी ,अचानक भाभी ने कहा इकबाल तुम अपनी जीभ मेरे चूत में घुसो और मेरे चूत में तेजी से घुमाओ मै वैसा ही करने लगा मेरा लंड तना हुआ था और भाभी ने उसे अपनी जांघो के बीच में दबा रखा था मैंने अपने लंड को रगड़ना शुरू कर दिया भाभी ने कहा इकबाल तुम मुझे गन्दी बाते कर के सुनाओ मैंने कहा तुम तो मुझे चोदने नही दे रही हो यदि तुम मुझे चोदने दो तो मै तुम्हारी चूत की इच्छा पूरी कर दूँगा भाभी आआः अआः ऊओह , ऊओह की आवाज कर रही थी .तभी भाभी ने अपनी चूत का पानी छोड़ दिया मैंने सारा अमृत चाट लिया ,मै भी अब झाड़ने वाला था भाभी ने कहा तुम ऊपर आकार मेरे चुन्चियो पर झडो मै उनके ऊपर आ गया भाभी ने मेरे लंड को पकड़ कर मेरा रस पुरी तरह निचोड़ दिया और कहा तुम इसे मेरी चुन्चियो पर मालिश कर दो मैंने उसकी चुन्चियो की मालिश काफी देर तक की भाभी ने कहा अब मुझे बाथरूम जाना है मैंने भाभी से कहा मै भी आपके साथ चलता हूँ
भाभी मन गयी भाभी ने मेरे सामने खड़े हो कर मूतना शुरू कर दिया मैंने भाभी के चूत को अपने हाथो से कवर कर लिया भाभी के गरम मूत से मुझे बहुत उत्तेजना हो रही थी मेरा पुरा शरीर रोमांचित था मै वन्ही पर चूत में अपना लंड घुसाने लगा मूत मेरे लंड पर होता हुआ मेरे जांघो से बह रहा था जब भाभी ने मूतना बंद किया तो मैंने भाभी के ऊपर चूत पर मूतना शुरू किया भाभी ने कहा तुम असे ही मेरी चूत में डाल दो , मैंने भाभी की चूत में अपना गरम लंड घुसा दिया भाभी को बहुत मजा आरहा था कुछ देर बाद भाभी तेजी से अपना चूतड हिलाते हुए कहा चोदो राजा चोदो आज से तुम ही मेरे पति हो , मै ये सुन कर और बुरी तरह से चोदते हुए झड़ गया.भाभी ने कहा आज बहुत मजा आया.आगे की कहानी पार्ट ६ में भेजूंगा .भाभी ने कहा आज मै चार बार चरम सुख प्राप्त किया.मैंने भाभी से कहा कि चरम सुख क्या है ? तो भाभी ने कहा ये वो बाद में बताएंगी .
ekbal_69@yahoo.co.in'via Blog this'
Thursday, 18 October 2012
आंटी और उनकी बेटी की चुदाई
हिन्दी मैं मस्त कहानियाँ: आंटी और उनकी बेटी की चुदाई
http://auntysexworld4free.blogspot.in/p/blog-page_912.html
वहाँ पर हमारे पड़ोस में एक अंकल-आंटी रहते थे जो मकान मालिक के चचेरेभाई थे। उनकी एक लड़की थी, क्या बताऊँ आपको, वो इतनी सेक्सी थी किदेखते ही लंड खड़ा हो जाये। आंटी भी जबरदस्त थी। हमारे उनके सम्बन्धबहुत ही अच्छे थे। वो हमारे घर हर रोज आया करती थी और माँ के साथ बैठकर गप्पें लगाती थी। वो जब भी आती थी तो मैं उनके इर्द-गिर्द ही रहता थाक्योंकि मैं खेल खेल में मस्ती में ही उनके बोबे दबा लिया करता था जो बहुतही नर्म थे।
एक दिन की बात है, मेरे घर पर कोई नहीं था। मेरी माँ और पिताजी भाई केसाथ किसी रिश्तेदार की शादी में गए थे। माँ आंटी को कहकर गई थी कि मेराखाना बनाकर घर भिजवा दें।
दोपहर को एक बजे मैं क्लास से घर पंहुचा ही था कि आंटी खाना लेकर आगई। वो लाल साड़ी पहने हुए थी और सफ़ेद ब्लाऊज़। ब्रा का रंग कला था जोसफ़ेद ब्लाऊज़ में से साफ़ दिख रही थी।
मैं रोज की तरह मस्ती में उनके बोबे दबाने लगा।
वो बोली- तुम खाना खा लो !
मैंने कहा- आप प्यार से खिलाओ !
वो मान गई और प्लेट में खाना निकाल कर मेरे सामने बैठ गई। तभी वोबोली- गर्मी ज्यादा है, पंखा चला दो !
मैंने खड़े होकर पंखा चला दिया और उनके सामने बैठ गया। तभी उनकाआँचल पंखे की हवा से उड़ा और उनके दोनों चूचियों के बीच की खाई मुझेसाफ दिखने लगी। मेरा लंड खडा होने लगा। वो मुझे खिलाती गई और मेरीनजर उनके वक्ष पर टिक गई।अचानक उनकी नजर मुझ पर पड़ी। वो समझगई कि मैं क्या देख रहा था पर उन्होंने कोई प्रतिक्रिया नहीं दी। मेरा लंड पूरातन गया। अचानक उनकी नजर मेरी पैंट पर पड़ी, वो हंसने लगी।
मैंने पूछा- क्या हुआ?
तो उन्होंने कुछ बताया नहीं और मेरे लिए पानी लेने चली गई। वो जब पानीलेकर वापस आई तो मैंने पूछा- आप क्यों हंस रही थी?
तो वो बोली- तेरा लंड मेरे बोबे देखकर ही तन गया !
मैं समझ गया कि आंटी को मस्ती करनी है। मैंने आंटी से कहा- क्या मैंआपके बोबे पूरे देख सकता हूँ?
तो वो झट से मान गई और साड़ी उतार दी। मुझसे कहा- बाकी ब्लाऊज़ औरब्रा तू निकाल ले।मैं झट से उनके बोबे दबाने लगा- अआह .......... क्यामुलायम बोबे थे !
मैं तो उनके बोबे जोर-जोर से मसलने लगा। वो भी आहें भरने लगी। फिर मैंनेउनका ब्लाऊज़ निकाला। वह क्या लग रही थी काली ब्रा में !
मैंने ब्रा के साथ ही उनके बोबे फिर से दबाना शुरु कर दिया।
वो आह ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह ईईईईए ऊऊऊऊ .....जैसी आवाजें निकालने लगी। 5मिनट के बाद मैंने ब्रा भी निकाल दी और देखा तो वाह ! क्या बोबे थे ! जैसेदूध की डेयरी !
मैं तो प्यासी बिल्ली की तरह उनके बोबे पर दूध पीने टूट पड़ा। मेरा लण्ड काबूके बाहर हो गया था।
अचानक आंटी बोली- बस ! अब मेरी बारी !
मैं समझ नहीं पाया। वो उठी और मेरी पैंट की जिप खोल दी, फिर पैंट हीनिकाल दी, मेरा अंडरवियर भी निकाल दिया और मेरा लण्ड देखकर बोली-वाह, क्या लण्ड है ! कम से कम सात इंच का होगा ! और उसे पकड़ करहिलाने लगी। मुझे अच्छा लगने लगा। अचानक उन्होंने मेरा लण्ड मुँह में लेलिया और जोर-जोर से चूसने लगी।
मुझे तो बड़ा मज़ा आ रहा था। दस मिनट तक वो मेरे लण्ड को चूसती हीरही। अचानक मुझे लगा कि मैं छोड़ने वाला हूँ तो मैंने आंटी को कहा- छुटरहा है !
वो बोली- छोड़ दे मेरे मुँह में !
और मैं झड़ गया।
वो बोली- क्या मस्त स्वाद है तेरे वीर्य का !
मेरा लण्ड ठंडा पड़ गया पर वो बहुत ही गरम हो चुकी थी। वो बोली- चल एककाम कर ! आज मैं तेरा कुंवारापन दूर करती हूँ।
मैंने पूछा- कैसे ?
तो बोली- तू जानता है कि सुहागरात में क्या होता है ?
मैंने कहा- नहीं !
तो बोली- चल मैं तुझे बताती हूँ !
और उन्होंने अपना चनिया निकाल दिया और पेंटी भी निकाल दी। मैं तोदेखता ही रह गया।
वो बोली- अब नीचे मेरी चूत में उंगली डाल !
मैंने वैसा ही किया।
वो चिल्लाने लगी- एक नहीं तीन उंगलियाँ दल कर अंदर-बाहर कर !
मैंने वैसा ही किया।
वो आहें भरने लगी- आह्ह्ह्ह् ........ऊऊ ऊऊऊऊउह्ह्ह्ह्...........उफ्फ्फ्फ्फ्फ्फ्फ्.........चु हूउदूऊ ऊउ..........
मैंने लगभग 15 मिनट तक उंगली-चोदन किया। अचानक उनकी चूत सेपानी निकलने लगा। मैं समझ गया कि आंटी झड़ गई हैं। पर मेरा लंड फिर सेतन गया था तो मैंने भी आंटी से कहा- आंटी, अब मेरे लंड को अपने मुँह मेंले लो ! वो फिर से तन गया है !
वो बोली- चोदू ! सिर्फ मुँहचोदन ही करेगा या चूत भी चोदेगा ?
मैं झट से तैयार हो गया। मैंने आंटी की टाँगें फ़ैलाई, उनकी चूत पर अपनालण्ड रखा और जोर से धक्का दिया।
आंटी चिल्ला उठी- लौड़े ! धीरे से डाल ! बेनचोद ! 6 महीने के बाद इतनाबाद लण्ड चूत में एक ही झटके में डाल रहा है ?
मैं उनके बोबे दबाने लगा, फिर दूसरे धक्के में मैंने अपना पूरा लण्ड आंटी कीचूत में डाल दिया।वो चिल्लाने लगी- निकाल बाहर ! फाड़ दी मेरी चूत !निकाल बाहर !
मैंने उनके होंठों पर अपने होंठ रख दिए और ऊपर पड़ा रहा। जैसे ही मुझे लगाकि वो अब दर्द कम हुआ है तो मैं धीरे-धीरे झटके देने लगा।
उनको मज़ा आने लगा था, वो भी उछल-उछल कर साथ दे रही थी- आः हह्ह्ह्ह ! ऊऽऽऽ फ़्फ़्फ़ ! आऽऽ आऽ ई ईऽऽए चोद ...जोर से ! मज़ा आ गया !जैसी आवाजें निकाल रही थी।
मैंने अपने झटकों की रफ्तार और तेज़ कर दी। वो भी मजे से चुदवा रही थी।15 मिनट के बाद मुझे लगा कि मेरा निकल रहा है, तो मैं आंटी से बोला-आंटी मेरा निकलने वाला है !
तो वो बोली- अंदर ही निकाल दे !
और मैं अंदर ही झड़ गया।
उस रोज़ हमने तीन बार चुदाई की और वो अपने घर चली गई। शाम को मेराखाना लेकर उसकी बेटी आई। वो बड़ी ही सेक्सी थी।
http://auntysexworld4free.blogspot.in/p/blog-page_912.html
आंटी और उनकी बेटी की चुदाई
वहाँ पर हमारे पड़ोस में एक अंकल-आंटी रहते थे जो मकान मालिक के चचेरेभाई थे। उनकी एक लड़की थी, क्या बताऊँ आपको, वो इतनी सेक्सी थी किदेखते ही लंड खड़ा हो जाये। आंटी भी जबरदस्त थी। हमारे उनके सम्बन्धबहुत ही अच्छे थे। वो हमारे घर हर रोज आया करती थी और माँ के साथ बैठकर गप्पें लगाती थी। वो जब भी आती थी तो मैं उनके इर्द-गिर्द ही रहता थाक्योंकि मैं खेल खेल में मस्ती में ही उनके बोबे दबा लिया करता था जो बहुतही नर्म थे।
एक दिन की बात है, मेरे घर पर कोई नहीं था। मेरी माँ और पिताजी भाई केसाथ किसी रिश्तेदार की शादी में गए थे। माँ आंटी को कहकर गई थी कि मेराखाना बनाकर घर भिजवा दें।
दोपहर को एक बजे मैं क्लास से घर पंहुचा ही था कि आंटी खाना लेकर आगई। वो लाल साड़ी पहने हुए थी और सफ़ेद ब्लाऊज़। ब्रा का रंग कला था जोसफ़ेद ब्लाऊज़ में से साफ़ दिख रही थी।
मैं रोज की तरह मस्ती में उनके बोबे दबाने लगा।
वो बोली- तुम खाना खा लो !
मैंने कहा- आप प्यार से खिलाओ !
वो मान गई और प्लेट में खाना निकाल कर मेरे सामने बैठ गई। तभी वोबोली- गर्मी ज्यादा है, पंखा चला दो !
मैंने खड़े होकर पंखा चला दिया और उनके सामने बैठ गया। तभी उनकाआँचल पंखे की हवा से उड़ा और उनके दोनों चूचियों के बीच की खाई मुझेसाफ दिखने लगी। मेरा लंड खडा होने लगा। वो मुझे खिलाती गई और मेरीनजर उनके वक्ष पर टिक गई।अचानक उनकी नजर मुझ पर पड़ी। वो समझगई कि मैं क्या देख रहा था पर उन्होंने कोई प्रतिक्रिया नहीं दी। मेरा लंड पूरातन गया। अचानक उनकी नजर मेरी पैंट पर पड़ी, वो हंसने लगी।
मैंने पूछा- क्या हुआ?
तो उन्होंने कुछ बताया नहीं और मेरे लिए पानी लेने चली गई। वो जब पानीलेकर वापस आई तो मैंने पूछा- आप क्यों हंस रही थी?
तो वो बोली- तेरा लंड मेरे बोबे देखकर ही तन गया !
मैं समझ गया कि आंटी को मस्ती करनी है। मैंने आंटी से कहा- क्या मैंआपके बोबे पूरे देख सकता हूँ?
तो वो झट से मान गई और साड़ी उतार दी। मुझसे कहा- बाकी ब्लाऊज़ औरब्रा तू निकाल ले।मैं झट से उनके बोबे दबाने लगा- अआह .......... क्यामुलायम बोबे थे !
मैं तो उनके बोबे जोर-जोर से मसलने लगा। वो भी आहें भरने लगी। फिर मैंनेउनका ब्लाऊज़ निकाला। वह क्या लग रही थी काली ब्रा में !
मैंने ब्रा के साथ ही उनके बोबे फिर से दबाना शुरु कर दिया।
वो आह ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह ईईईईए ऊऊऊऊ .....जैसी आवाजें निकालने लगी। 5मिनट के बाद मैंने ब्रा भी निकाल दी और देखा तो वाह ! क्या बोबे थे ! जैसेदूध की डेयरी !
मैं तो प्यासी बिल्ली की तरह उनके बोबे पर दूध पीने टूट पड़ा। मेरा लण्ड काबूके बाहर हो गया था।
अचानक आंटी बोली- बस ! अब मेरी बारी !
मैं समझ नहीं पाया। वो उठी और मेरी पैंट की जिप खोल दी, फिर पैंट हीनिकाल दी, मेरा अंडरवियर भी निकाल दिया और मेरा लण्ड देखकर बोली-वाह, क्या लण्ड है ! कम से कम सात इंच का होगा ! और उसे पकड़ करहिलाने लगी। मुझे अच्छा लगने लगा। अचानक उन्होंने मेरा लण्ड मुँह में लेलिया और जोर-जोर से चूसने लगी।
मुझे तो बड़ा मज़ा आ रहा था। दस मिनट तक वो मेरे लण्ड को चूसती हीरही। अचानक मुझे लगा कि मैं छोड़ने वाला हूँ तो मैंने आंटी को कहा- छुटरहा है !
वो बोली- छोड़ दे मेरे मुँह में !
और मैं झड़ गया।
वो बोली- क्या मस्त स्वाद है तेरे वीर्य का !
मेरा लण्ड ठंडा पड़ गया पर वो बहुत ही गरम हो चुकी थी। वो बोली- चल एककाम कर ! आज मैं तेरा कुंवारापन दूर करती हूँ।
मैंने पूछा- कैसे ?
तो बोली- तू जानता है कि सुहागरात में क्या होता है ?
मैंने कहा- नहीं !
तो बोली- चल मैं तुझे बताती हूँ !
और उन्होंने अपना चनिया निकाल दिया और पेंटी भी निकाल दी। मैं तोदेखता ही रह गया।
वो बोली- अब नीचे मेरी चूत में उंगली डाल !
मैंने वैसा ही किया।
वो चिल्लाने लगी- एक नहीं तीन उंगलियाँ दल कर अंदर-बाहर कर !
मैंने वैसा ही किया।
वो आहें भरने लगी- आह्ह्ह्ह् ........ऊऊ ऊऊऊऊउह्ह्ह्ह्...........उफ्फ्फ्फ्फ्फ्फ्फ्.........चु हूउदूऊ ऊउ..........
मैंने लगभग 15 मिनट तक उंगली-चोदन किया। अचानक उनकी चूत सेपानी निकलने लगा। मैं समझ गया कि आंटी झड़ गई हैं। पर मेरा लंड फिर सेतन गया था तो मैंने भी आंटी से कहा- आंटी, अब मेरे लंड को अपने मुँह मेंले लो ! वो फिर से तन गया है !
वो बोली- चोदू ! सिर्फ मुँहचोदन ही करेगा या चूत भी चोदेगा ?
मैं झट से तैयार हो गया। मैंने आंटी की टाँगें फ़ैलाई, उनकी चूत पर अपनालण्ड रखा और जोर से धक्का दिया।
आंटी चिल्ला उठी- लौड़े ! धीरे से डाल ! बेनचोद ! 6 महीने के बाद इतनाबाद लण्ड चूत में एक ही झटके में डाल रहा है ?
मैं उनके बोबे दबाने लगा, फिर दूसरे धक्के में मैंने अपना पूरा लण्ड आंटी कीचूत में डाल दिया।वो चिल्लाने लगी- निकाल बाहर ! फाड़ दी मेरी चूत !निकाल बाहर !
मैंने उनके होंठों पर अपने होंठ रख दिए और ऊपर पड़ा रहा। जैसे ही मुझे लगाकि वो अब दर्द कम हुआ है तो मैं धीरे-धीरे झटके देने लगा।
उनको मज़ा आने लगा था, वो भी उछल-उछल कर साथ दे रही थी- आः हह्ह्ह्ह ! ऊऽऽऽ फ़्फ़्फ़ ! आऽऽ आऽ ई ईऽऽए चोद ...जोर से ! मज़ा आ गया !जैसी आवाजें निकाल रही थी।
मैंने अपने झटकों की रफ्तार और तेज़ कर दी। वो भी मजे से चुदवा रही थी।15 मिनट के बाद मुझे लगा कि मेरा निकल रहा है, तो मैं आंटी से बोला-आंटी मेरा निकलने वाला है !
तो वो बोली- अंदर ही निकाल दे !
और मैं अंदर ही झड़ गया।
उस रोज़ हमने तीन बार चुदाई की और वो अपने घर चली गई। शाम को मेराखाना लेकर उसकी बेटी आई। वो बड़ी ही सेक्सी थी।
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