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Friday, 19 October 2012

मैं बहक गयी २

- चाची चुदाई, साली चुदाई, आंटी चुदाई, दीदी चुदाई, जीजा जी चुदाई, पड़ोसन, भाभियां, मस्त कर दे, मामी, मूठ, मोसी, साली, सेक्स कहानी, अंतर्वासना, अंतरवासना:

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लीना
मैं लीना, मैं ३९ साल की हूं। शादी शुदा हूं। किस्मत अच्छी है कि मैं आज भी बहुत सुन्दर, सेक्सी हूं, मुझे पता है कि कई लंड वाले मेरी स्टोरी पढ़कर मुझे चोदना चाहेंगे लेकिन मैं लिस्बो हूं मुझे लड़कियों से सेक्स की बाते करना और फ़ोरप्ले करना अच्छा लगता है इसलिये लड़कों, मेरी कहानी पढ़कर अपना लंड हिलाकर शांत हो जाना लेकिन गर्ल्स मुझे रेप्लय करना। १० साल पुरानी घटना है मैं आपसे अपना एक एक्सपेरिएंस बताती हूँ बात ११ साल पहले की है मेरी ननद का लड़का (अज्जु) जिसकी उमर १७-१८ साल थी एक्साम देने के लिये हमारे घर आया मेरे पति न दिनो टूर पर ज्यादा रहते थे इसलिये मैं सेक्स के लिये परेशान रहती थी। घर में सिर्फ़ दो रूम थे जिस कारण अज्जु से मुझे चिड़ हो रही थी कि इसकी बजह से मेरे जीवन का आनंद जा रहा है, उस दिन पति रात की ट्रेन से ७ दिन के लिये बाहर जाने वाले थे पति ने बोला वह दोपहर को आ जायेंगे जब अज्जु कोलेज में रहेगा और बच्चों को सुला देंगे फिर प्यार से सेक्स करेंगे क्योंकि ७ दिन नहीं मिलेगा।
मैं बहुत खुश थी मैं ने नहाने से पहले शेव की बहुत सुन्दर सेक्सी अंडर गारमेंट्स और साड़ी पहनी लेकिन मेरी किस्मत खराब, पहले तो पति लेट हो गये और जैसे ही वह आये पीछे से अज्जु भी आ गया मेरा दिमाग खराब हो गया मैं फालतू में अज्जु को डाटने लगी, पति भी मुझ पर नाराज़ हो गये कहने लगे जीवन पड़ा है, क्यों परेशान हूं फिर मैं मन मार कर उनके जाने की तैयारी करने लगी बारिश के दिन थे पानी गिरने लगा पति की ट्रेन १० बजे रात की थी मैने जल्दी खाना सब को खिला दिया ९ बजे करीब पति अंदर किचन में आये मुझे पीछे से पकड़कर चूमा-चाटी करने लगे, उनका हथियार अपने नितम्बों पर महसूस करके बहुत उत्तेजित हो गयी मैं ने पति को बताया आज की तैयारी में मैं ने क्या-क्या किया पति ने साड़ी के अंदर मेरी पैंटी में हाथ डालकर मेरी चिकनी चूत सहलायी।
मैं ने उनके हथियार को हाथों से सहलाया मेरी चूत चुदाई के लिये तैयार हो गयी थी गीली होने लगी, इतने में अज्जु ने आवाज़ दी "मामा, ट्रेन का समय हो गया चलो" फिर अज्जु उन्हे स्कूटर से छोड़ने स्टेशन चला गया, मैं हाल में लेटकर टीवी देखने लगी मैं बहुत गरम महसूस कर रही थी और मुझे अपनी किस्मत पर भी रोना आ रहा था मे उत्तेजना से भरकर अपनी साड़ी में हाथ डालकर अपनी बुर को सहलाने लगी, इतने में स्कूटर की आवाज आयी मैं ने अपने कपड़े सही किये दरवाज़ा खोला अज्जु भीग कर आया था मैने उसे गुस्से से "बोला जल्दी पोंछ कर कपड़े बदल ले वरना तबियत खराब हो गयी तो हमारी ही मुसीबत होगी"
वो सहम गया मैं अंदर रूम में चली गयी रूम का दरवाज़ा बंद करने आयी तो देखा अज्जु अपनी गीली बनियान उतार रहा था उसकी नंगी पीठ देखकर मुझे कुछ अजीब सा महसूस हुआ और मैं हाल में आ गयी और कुछ ढूंढने का नाटक करते हुए तिरछी नज़र से उसे देखने लगी फिर उसने अपनी पैंट उतारी उसकी अंडरवेअर सफेद थी जो गीली होने से अज्जु के शरीर से चिपक गयी थी मैने देखा अज्जु का काला लंड मुड़ा हुआ साफ़ दिख रहा था वह भरपूर मोटा था जबकि खड़ा नहीं था, काले-काले बाल भी नज़र आ रहे थे और उसके लंड का गुलाबी सुपाड़ा तो एकदम चमक रहा था, वह मुझे भरपूर मर्द का जवान लंड दिख रहा था जिसे हर कोई औरत अपनी चूत में डलवाना चाहेगी चाहे वह सती सावित्री क्यो न हो, मेरी हालत जवान लड़के को अपने इतने करीब नंगा देखकर बहुत खराब हो गयी और मैं सपने में भी नहीं सोच सकी कि अज्जु इतना जवान है उसके शरीर को देखकर मैं रिश्ते को भूल गयी मैं ने सोचा रात को इसका मज़ा लेना है जो होगा देखा जायेगा फिर अज्जु ने कपड़े पहन लिये, फिर अज्जु बिस्तर पर लेट गया मैं अपने रूम में आ गयी और मैने अपनी साड़ी, ब्लाउज़ ब्रा और पेटीकोट उतार कर नाइटी पहन ली।
हमारा बाथरूम पीछे आंगन में था रात के करीब ११ बज रहे थे, मैने अज्जु को आवाज़ दी वह बोला जी मामी मैने कहा मुझे पीछे पेशाब जाना है डर लग रहा है, तू साथ चल मैने पीछे की लाइट जलायी और बाथरूम के बाहर नाली के पास जाकर अपनी नाइटी उठाई कमर के ऊपर और धीरे से अपनी पैंटी सरकाई ताकि अज्जु मेरी चिकनी टांग और गांड आराम से देख सके और बैठ गयी, अज्जु मेरे पीछे ही खड़ा था मैने पीछे देखते हुआ बोला जाना मत, वह बोला जी मामी फिर मैं अज्जु की मुंह की तरफ़ होकर खड़ी हुई फिर मैं ने अपनी नाइटी कमर से ऊपर उठा कर पैंटी पहनी ताकि अज्जु को मेरी साफ़ चूत दिख जाये और वह भी बहक जाये अज्जु की आंखों में शरम थी लेकिन वह मेरी चूत और नंगी जांघों को देख रहा था लेकिन वह वापस जाकर सो गया मैं अपने रूम में आयी और सोचा अज्जु को आवाज देकर अपने पास बुलाऊं लेकिन डर लग रहा था कही कुछ गलत तो नहीं हो रहा है लेकिन मेरी सांस तेज़-तेज़ चल रही थी और मेरी चूत चिल्ला कर कह रही थी कि उसे लंड चाहिये मेरी हालत पागलों जैसी हो गयी मैं उठ कर बैठ गयी, अज्जु के कमरे की लाइट जल रही थी मैने धीरे से उठ कर अज्जु के रूम में झांका वह उल्टा होकर सो रहा था फ़िर मेरा हाथ अपने आप अपनी चूत पर जा रहा था, समझ नहीं आ रहा था कि कैसे शुरुआत करूं।
तभी मैने महसूस किया कि अज्जु कुछ हिल रहा है (जैसे आदमी औरत के ऊपर होकर हिलता है वैसे) मुझे समझते देर नहीं लगी कि वह मेरी नंगी जांघों को और चिकनी चूत को देखकर उत्तेजित हो गया है और अपना पनी निकालने की तैयारी में है मैने समय गंवाये बिना अज्जु के रूम में चली गयी मैं ने देखा अज्जु ने धीरे से अपनी आंख खोल कर मुझे देखा और सोने का नाटक करने लगा मैं कुरसी पर बैठ गयी मैने सोचा देखूं अब अज्जु हिलता है या नहीं यदि हिलेगा तो उससे खुल कर चुदवाने का बोल दूंगी लेकिन १०-१२ मिनट में साला बिल्कुल नहीं हिला और मेरी हालत खराब हुये जा रही थी। मुझे समझ नहीं आ रहा था कि क्या करूं रात के करीब १ बज गये थे फ़िर मैं ने टीवी ओन कर दिया और देखने लगी तभी अज्जु आंख घिसते हुए उठ कर बैठ गया कहने लगा, क्या हुआ मामी, सो क्यों नहीं रही हो? मैने बोला नींद नहीं आ रही। दुख रहा है अज्जु ने कहा क्या सर दुख रहा है? मैने कहा नहीं पूरा शरीर दुख रहा है, अज्जु ने कहा तबियत तो ठीक है, मैने कहा हां अज्जु बोला मैं कुछ मदद करूं, मैं ने कहा, प्लीज मेरे पैर दबा दे, अज्जु ने कहा ठीक है, फ़िर अज्जु के बिस्तर पर मैं लेट गयी अज्जु मेरे पैर दबाने लगा मैने कहा प्लीज थोड़ा ऊपर और ऊपर अज्जु बिस्तर पर बैठकर मेरी जांघें दबा रहा था मेरी चूत से रस निकल रहा था मुझे अपनी पैंटी गीली-गीली महसूस हो रही थी।
तभी मुझे महसूस हुआ अज्जु मेरी चूत को नाइटी के ऊपर से अज्जु टच कर रहा था और चूत के ऊपर अपनी उंगलियां चला रहा था मेरी सांस बहुत तेज़-तेज़ चलने लगी। मैने अपना एक हाथ अज्जु के लंड पर रख दिया उसका लंड ८" का पूरी तरह खड़ा था बहुत मोटा महसूस हो रहा था। तभी अज्जु बोला "मेरा लंड कैसा लगा" फ़िर मैं ने कहा मुझे आज यह चाहिये है तभी अज्जु मेरे बाजु में आ गया और मेरे सीने को सहला रहा था। मुझे बहुत मज़ा आ रहा था, मेने अपने एक हाथ से उसका लंड सहलाना चलू रखा और उसकी गांड भी सहला रही थी। उसकी हिम्मत और बढ़हई और वो मेरे ब्रेअस्ट को जोर-जोर से दबाने लगा। मुझे सिंहरन होने लगी और मैं ने करवट बदल कर सीधी सो गई तो उसने हाथ हटा लिया और थोड़ी देर बाद वो फ़िर से मेरा बूब्स सहलाने लगा। फ़िर वो मेरी नाइटी उतारने लगा और वो मेरे नेकेड बूब्स को चूसने लगा। मैं बहुत ही गरम हो रही थी मैं उठ गयी और मैने उसे कपड़े निकालने को कहा, उसने तुरंत अपने सारे कपड़े निकाल दिये और पूरा नंगा हो गया। मैने उसके लंड को देखा वो बहुत ही बड़ा था।
फ़िर उसने मेरी पैंटी को निकाल दी। फ़िर वो मुझे किस करने लगा और मैं भी उसे बहुत किस करने लगी फ़िर उसने मुझे बेली पर किस किया। आआआअह्हह्हह्हह्हह ऊओह्हह्हह मुझे बहुत मज़ा आ रहा था और मैं बहुत ही गरम हो चुकी थी। फ़िर वो मेरे चूत को चाटने लगा। और मैं अंगड़ाई लेने लगी ऊऊऊऊफ़्फ़फ़्फ़फ़ मुझे कुछ समझ में नहीं आ रहा था कि मैं क्या करूं। फ़िर मैने उसे कहा प्लीज और मत तड़पाओ प्लीज मुझे चोदो। फ़िर वो मेरे ऊपर आ गया और उसने उसके लंड को मेरे चूत पे रखा और फ़िर धक्का मरा तो उसका पुरा लंड एक ही झटके में अंदर चला गया। और मैं जोर से चीख उठी आआआआअह्हह्हह्ह। आआआह्हह्ह। फ़िर वो जोर जोर से मुझे चोदते गया और मैं भी अपने हिप्स उठा उठा के उसे साथ देने लगी। और आआआअह आआआह्हह्हह्ह उह्हह्हूऊऊउह्हह्ह वो जोर जोर से चोदने लगा।
फ़िर थोड़ि देर बाद उसने मेरी चूत में गरमा गरम लावा छोड़ दिया फ़िर सारी रात हम दोनो एक दूसरे साथ नंगे चिपके सो गये
इसके बाद उसका जब भी मन होता तो वो मेरे ब्लाउज़ को हटा के मेरे निप्पल चूसता रहता लेकिन मुझे पूछे बिना मेरी चूत को नहीं छूता था। एक दिन मैं नहा रही थी तो वो भी बाथरूम में आ गया और मुझसे बाथरूम में ही प्यार की भीख मांगने लगा तो मैं उसे मना नहीं कर पायी। फ़िर उसने सारे कपड़े निकाल दिये और हम शोवर साथ लेने लगे। फ़िर मैं दीवर का सहारा लेके खड़ी रही और उसने मुझे बहुत टाइट पकड़ा और मेरे होंठों का जूस पीने लगा और उसने मेरी एक टांग को उठा के फ़िर मुझे चोदने लगा। उसने मुझे एक नये अनुभव का सुख दिया। मे बहुत भी खुश हो गयी, मैं अज्जु को बहुत चाहती हूं। और वो भी मुझे बहुत चाहता है। फ़िर हमने कई बार सेक्स किया। मैं मेरे पति को भी चाहती हू.

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मेरी कहानी पार्ट –५

प्रेषक : राजेश राज
मेरे इम्तहान पास आ गए थे अब मै अपनी पढाई पर जयादा ध्यान दे रहा था ,लेकिन भाभी की याद आ ही जाती थी .उस दिन जब मै स्कूल से घर आया तो मेरी मम्मी ने बताया की अगले हफ्ते तुम्हारी मौसी की शादी में जाना है तो मैंने कहा मेरे तो एक्साम्स है मै कैसे जा सकता हूँ ? तो घर में सभी चिंतित हो गए ये सारी बाते भाभी को पता चली तो उन्होंने कहा अरे इसे मेरे घर छोड़ दीजियेगा मै इसे पढ़ा भी दिया करूंगी .
शनिवार को सब लोग जबल पुर चले गए और मै अपनी सारी किताबे ले कर भाभी के घर चला आया .मैंने और भइया ने साथ में ही नाश्ता कर लिया तो भइया ने कहा चलो मै तुम्हे स्कूल छोड़ते हुए जाऊंगा ,स्कूल से मै घर लगभग तीन बजे ही आ गया ,भाभी ने दरवाजा खोला ,भाभी ने आज सफ़ेद रंग की चूडीदार और काले रंग का कुरता पहन रखा था ,आज वो कुछ जादा ही प्रसन्न दिख रही थी ,खाना खा कर हम दोनों बेड रूम में आ गए भाभी ने छोटू को पहले से ही सुला दिया था .भाभी ने बताया की मेरे ब्रा की साइज़ बढ़ गयी है मैंने हंसते हुए कहा बंद इतनी मेहनत कर रहा है तो उसका फल भी मिलेगा .
भाभी ने कहा आज हम दोनों एक खेल खेलेंगे मै तुम्हे एक फ़िल्म दिखाउंगी फ़िर हम दोनों सेक्स करेंगे ,फ़िल्म देखते समय हम अपने कपडे उतर देंगे और एक दूसरे को टच नही करेंगे मैंने कहा भाभी ऐसे तो मजा नही आयेगा तो उसने कहा तुम तो बस देखते जाओ .भाभी ने सी डी पर फ़िल्म लगा दी , अरी ये तो कोई सेक्सी फ़िल्म थी भाभी ने कहा हम एक दोसरे के कपडे उतर देते है .हम दोनों बेड पर ही बैठ कर फ़िल्म देखने लगे .फ़िल्म में औरत लगभग ४० साल की होगी और २५ साल का लड़का होगा दोनों बाथ टब में नहा रहे थे लड़का बाथ टब के किनारे बैठ गया उस का लंड तना हुआ था लड़की सोप लगा कर उसके लंड को सहलाने लगी लड़का तनाव में भरता जा रहा था फ़िर लडके ने सोप लेकर लड़की की चूत रगड़ने लगा उसके बूब्स बहुत बड़े बड़े थे दोनों एक दूसरे के साथ खेलते जा रहे थे फ़िर दोनों नंगे ही बेड रूम में चले गए लड़की बेड पर लेट गयी लडके तौलिए से लड़की का बदन सुखाने लगा उसके बाद उसने लड़की के पैरो की उंगलियो को अपने होठो से चाटने लगा फ़िर वो उसकी चूत पर अपना मुंह लगा दिया .इधर मेरा लंड तनाव से फटने लगा मै अपने हाथो से अपने लंड को हिलाने लगा और मने देखा की भाभी भी अपनी उन्गुलियो को अपनी चूत पर रगड़ रही है
हम दोनों ने एक दूसरे की जरूरत को समझते हुए पास आ गए भाभी ने कहा तुम भी मेरी उन्गोलियो को चूसो मै पागलो की तरह भाभी का तलवा चाटने लगा भाभी के पैर बहुत सुंदर थे भाभी मेरे लंड को हिलाती रही मै अब भाभी की जांघो को चूस रहा था इसमे मुझे बहुत मजा आ रहा था .
धीरे धीरे मेरे होठ भाभी की चूत पर पहुँच गए और मै अमृत का रसास्वादन कराने लगा ,भाभी ने मेरे सर को अपने हाथो से पकड़ रखा था ,भाभी धीरे धीरे सीत्कार ले रही थी ,अचानक भाभी ने कहा इकबाल तुम अपनी जीभ मेरे चूत में घुसो और मेरे चूत में तेजी से घुमाओ मै वैसा ही करने लगा मेरा लंड तना हुआ था और भाभी ने उसे अपनी जांघो के बीच में दबा रखा था मैंने अपने लंड को रगड़ना शुरू कर दिया भाभी ने कहा इकबाल तुम मुझे गन्दी बाते कर के सुनाओ मैंने कहा तुम तो मुझे चोदने नही दे रही हो यदि तुम मुझे चोदने दो तो मै तुम्हारी चूत की इच्छा पूरी कर दूँगा भाभी आआः अआः ऊओह , ऊओह की आवाज कर रही थी .तभी भाभी ने अपनी चूत का पानी छोड़ दिया मैंने सारा अमृत चाट लिया ,मै भी अब झाड़ने वाला था भाभी ने कहा तुम ऊपर आकार मेरे चुन्चियो पर झडो मै उनके ऊपर आ गया भाभी ने मेरे लंड को पकड़ कर मेरा रस पुरी तरह निचोड़ दिया और कहा तुम इसे मेरी चुन्चियो पर मालिश कर दो मैंने उसकी चुन्चियो की मालिश काफी देर तक की भाभी ने कहा अब मुझे बाथरूम जाना है मैंने भाभी से कहा मै भी आपके साथ चलता हूँ
भाभी मन गयी भाभी ने मेरे सामने खड़े हो कर मूतना शुरू कर दिया मैंने भाभी के चूत को अपने हाथो से कवर कर लिया भाभी के गरम मूत से मुझे बहुत उत्तेजना हो रही थी मेरा पुरा शरीर रोमांचित था मै वन्ही पर चूत में अपना लंड घुसाने लगा मूत मेरे लंड पर होता हुआ मेरे जांघो से बह रहा था जब भाभी ने मूतना बंद किया तो मैंने भाभी के ऊपर चूत पर मूतना शुरू किया भाभी ने कहा तुम असे ही मेरी चूत में डाल दो , मैंने भाभी की चूत में अपना गरम लंड घुसा दिया भाभी को बहुत मजा आरहा था कुछ देर बाद भाभी तेजी से अपना चूतड हिलाते हुए कहा चोदो राजा चोदो आज से तुम ही मेरे पति हो , मै ये सुन कर और बुरी तरह से चोदते हुए झड़ गया.भाभी ने कहा आज बहुत मजा आया.आगे की कहानी पार्ट ६ में भेजूंगा .भाभी ने कहा आज मै चार बार चरम सुख प्राप्त किया.मैंने भाभी से कहा कि चरम सुख क्या है ? तो भाभी ने कहा ये वो बाद में बताएंगी .
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Thursday, 18 October 2012

आंटी और उनकी बेटी की चुदाई

हिन्दी मैं मस्त कहानियाँ: आंटी और उनकी बेटी की चुदाई

http://auntysexworld4free.blogspot.in/p/blog-page_912.html


आंटी और उनकी बेटी की चुदाई


वहाँ पर हमारे पड़ोस में एक अंकल-आंटी रहते थे जो मकान मालिक के चचेरेभाई थे। उनकी एक लड़की थीक्या बताऊँ आपकोवो इतनी सेक्सी थी किदेखते ही लंड खड़ा हो जाये। आंटी भी जबरदस्त थी। हमारे उनके सम्बन्धबहुत ही अच्छे थे। वो हमारे घर हर रोज आया करती थी और माँ के साथ बैठकर गप्पें लगाती थी। वो जब भी आती थी तो मैं उनके इर्द-गिर्द ही रहता थाक्योंकि मैं खेल खेल में मस्ती में ही उनके बोबे दबा लिया करता था जो बहुतही नर्म थे।
एक दिन की बात हैमेरे घर पर कोई नहीं था। मेरी माँ और पिताजी भाई केसाथ किसी रिश्तेदार की शादी में गए थे। माँ आंटी को कहकर गई थी कि मेराखाना बनाकर घर भिजवा दें।
दोपहर को एक बजे मैं क्लास से घर पंहुचा ही था कि आंटी खाना लेकर गई। वो लाल साड़ी पहने हुए थी और सफ़ेद ब्लाऊज़। ब्रा का रंग कला था जोसफ़ेद ब्लाऊज़ में से साफ़ दिख रही थी।
मैं रोज की तरह मस्ती में उनके बोबे दबाने लगा।
वो बोलीतुम खाना खा लो !
मैंने कहाआप प्यार से खिलाओ !
वो मान गई और प्लेट में खाना निकाल कर मेरे सामने बैठ गई। तभी वोबोलीगर्मी ज्यादा हैपंखा चला दो !
मैंने खड़े होकर पंखा चला दिया और उनके सामने बैठ गया। तभी उनकाआँचल पंखे की हवा से उड़ा और उनके दोनों चूचियों के बीच की खाई मुझेसाफ दिखने लगी। मेरा लंड खडा होने लगा। वो मुझे खिलाती गई और मेरीनजर उनके वक्ष पर टिक गई।अचानक उनकी नजर मुझ पर पड़ी। वो समझगई कि मैं क्या देख रहा था पर उन्होंने कोई प्रतिक्रिया नहीं दी। मेरा लंड पूरातन गया। अचानक उनकी नजर मेरी पैंट पर पड़ीवो हंसने लगी।
मैंने पूछाक्या हुआ?
तो उन्होंने कुछ बताया नहीं और मेरे लिए पानी लेने चली गई। वो जब पानीलेकर वापस आई तो मैंने पूछाआप क्यों हंस रही थी?
तो वो बोलीतेरा लंड मेरे बोबे देखकर ही तन गया !
मैं समझ गया कि आंटी को मस्ती करनी है। मैंने आंटी से कहाक्या मैंआपके बोबे पूरे देख सकता हूँ?
तो वो झट से मान गई और साड़ी उतार दी। मुझसे कहाबाकी ब्लाऊज़ औरब्रा तू निकाल ले।मैं झट से उनके बोबे दबाने लगाअआह .......... क्यामुलायम बोबे थे !
मैं तो उनके बोबे जोर-जोर से मसलने लगा। वो भी आहें भरने लगी। फिर मैंनेउनका ब्लाऊज़ निकाला। वह क्या लग रही थी काली ब्रा में !
मैंने ब्रा के साथ ही उनके बोबे फिर से दबाना शुरु कर दिया।
वो आह ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह ईईईईए ऊऊऊऊ .....जैसी आवाजें निकालने लगी। 5मिनट के बाद मैंने ब्रा भी निकाल दी और देखा तो वाह ! क्या बोबे थे ! जैसेदूध की डेयरी !
मैं तो प्यासी बिल्ली की तरह उनके बोबे पर दूध पीने टूट पड़ा। मेरा लण्ड काबूके बाहर हो गया था।
अचानक आंटी बोलीबस ! अब मेरी बारी !
मैं समझ नहीं पाया। वो उठी और मेरी पैंट की जिप खोल दीफिर पैंट हीनिकाल दीमेरा अंडरवियर भी निकाल दिया और मेरा लण्ड देखकर बोली-वाहक्या लण्ड है ! कम से कम सात इंच का होगा ! और उसे पकड़ करहिलाने लगी। मुझे अच्छा लगने लगा। अचानक उन्होंने मेरा लण्ड मुँह में लेलिया और जोर-जोर से चूसने लगी।
मुझे तो बड़ा मज़ा  रहा था। दस मिनट तक वो मेरे लण्ड को चूसती हीरही। अचानक मुझे लगा कि मैं छोड़ने वाला हूँ तो मैंने आंटी को कहाछुटरहा है !
वो बोलीछोड़ दे मेरे मुँह में !
और मैं झड़ गया।
वो बोलीक्या मस्त स्वाद है तेरे वीर्य का !
मेरा लण्ड ठंडा पड़ गया पर वो बहुत ही गरम हो चुकी थी। वो बोलीचल एककाम कर ! आज मैं तेरा कुंवारापन दूर करती हूँ।
मैंने पूछाकैसे ?
तो बोलीतू जानता है कि सुहागरात में क्या होता है ?
मैंने कहानहीं !
तो बोलीचल मैं तुझे बताती हूँ !
और उन्होंने अपना चनिया निकाल दिया और पेंटी भी निकाल दी। मैं तोदेखता ही रह गया।
वो बोलीअब नीचे मेरी चूत में उंगली डाल !
मैंने वैसा ही किया।
वो चिल्लाने लगीएक नहीं तीन उंगलियाँ दल कर अंदर-बाहर कर !
मैंने वैसा ही किया।
वो आहें भरने लगीआह्ह्ह्ह् ........ऊऊ ऊऊऊऊउह्ह्ह्ह्...........उफ्फ्फ्फ्फ्फ्फ्फ्.........चु हूउदूऊ ऊउ..........
मैंने लगभग 15 मिनट तक उंगली-चोदन किया। अचानक उनकी चूत सेपानी निकलने लगा। मैं समझ गया कि आंटी झड़ गई हैं। पर मेरा लंड फिर सेतन गया था तो मैंने भी आंटी से कहाआंटीअब मेरे लंड को अपने मुँह मेंले लो ! वो फिर से तन गया है !
वो बोलीचोदू ! सिर्फ मुँहचोदन ही करेगा या चूत भी चोदेगा ?
मैं झट से तैयार हो गया। मैंने आंटी की टाँगें फ़ैलाईउनकी चूत पर अपनालण्ड रखा और जोर से धक्का दिया।
आंटी चिल्ला उठीलौड़े ! धीरे से डाल ! बेनचोद ! 6 महीने के बाद इतनाबाद लण्ड चूत में एक ही झटके में डाल रहा है ?
मैं उनके बोबे दबाने लगाफिर दूसरे धक्के में मैंने अपना पूरा लण्ड आंटी कीचूत में डाल दिया।वो चिल्लाने लगीनिकाल बाहर ! फाड़ दी मेरी चूत !निकाल बाहर !
मैंने उनके होंठों पर अपने होंठ रख दिए और ऊपर पड़ा रहा। जैसे ही मुझे लगाकि वो अब दर्द कम हुआ है तो मैं धीरे-धीरे झटके देने लगा।
उनको मज़ा आने लगा थावो भी उछल-उछल कर साथ दे रही थीआः ह्ह्ह्ह ! ऊऽऽऽ फ़्फ़्फ़ ! आऽऽ आऽ  ईऽऽए चोद ...जोर से ! मज़ा  गया !जैसी आवाजें निकाल रही थी।
मैंने अपने झटकों की रफ्तार और तेज़ कर दी। वो भी मजे से चुदवा रही थी।15 मिनट के बाद मुझे लगा कि मेरा निकल रहा हैतो मैं आंटी से बोला-आंटी मेरा निकलने वाला है !
तो वो बोलीअंदर ही निकाल दे !
और मैं अंदर ही झड़ गया।
उस रोज़ हमने तीन बार चुदाई की और वो अपने घर चली गई। शाम को मेराखाना लेकर उसकी बेटी आई। वो बड़ी ही सेक्सी थी।
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